शायरी – धोखा है देता जो रहता करीब है

पेड़ों की डाल न दाना नसीब है

इंटों के जंगल में चिड़िया गरीब है

 

माटी की सूरत को शीशे में तौले

पैमाना आंखों का कितना अजीब है

 

सबने ये अक्सर तज़रबा किया है

धोखा है देता जो रहता करीब है

 

दो बातें आओ उन्हीं से करें हम

दुनिया में दिखता जो बदनसीब है

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