शायरी – मेरे इस दिल में छुपे हो मेरे महबूब कहीं

तुम कभी खोये नहीं हो मेरे महबूब कहीं

मेरे इस दिल में छुपे हो मेरे महबूब कहीं

 

मेरी दुनिया की चमकती हुई हर चीज हो तुम

चांद तारों में जले हो मेरे महबूब कहीं

 

मुझे हर रोज ये दरिया बुलाती है करीब

इसके पानी में घुले हो मेरे महबूब कहीं

 

ये हवाएं मुझे छूके कुछ कहा करती हैं

जैसे कि तुम बोले हो मेरे महबूब कहीं

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