शायरी – ये दिल था मेरे सीने में ऐसे पड़ा हुआ

ये दिल था मेरे सीने में ऐसे पड़ा हुआ

जैसे कि बाती कोई दीये में जला हुआ

 

कितने सुकूं से पड़ा है आस्मा में चांद

शायद मेरी तरह ही है ये फकीर बना हुआ

 

आहट जो बूंद की हुई, कहने लगी पलक

सूखेगा कैसे बारिश में जख्म भींगा हुआ

 

कागज पे दिल से लिख रहा खून से गजल

लगता है हर पल सीने में खंजर चुभा हुआ

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