सच्ची मोहब्बत शायरी

शायरी – वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

शायरी रस्मे दुनिया है और वालिद का आशियां है वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

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हाले दिल जानकर भी वो नहीं आएंगे
इश्क उनको भी है फिर भी नहीं मानेंगे

रस्मे दुनिया है और वालिद का आशियां है
वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

हम तो सहकर जीए जाते हैं उनके सितम
जाने कब तक वो मेरे दिल को आजमाएंगे

रात तन्हा ही सही, दिन बेसहारा ही सही
बस उनके दर्द में हम हर लम्हा बिताएंगे

©राजीव सिंह शायरी

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