शायरी – वो खामोशी से गम को दिखाती रही

साये में है मेरा कहीं हमसाया नहीं

जो खुदा हो गया, वो खुद आया नहीं

 

तूने अश्कों से ऐसी कहानी लिखी

जिसको पढ़के कोई रो पाया नहीं

 

वो खामोशी से गम को दिखाती रही

पर किया एक लफ्ज हमपे ज़ाया नहीं

 

यूं तो लिखता रहा उसपे अपनी गजल

उसको जाके कभी तो सुनाया नहीं

(ज़ाया- बर्बाद)

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