शायरी – सर उठाओ मेरे महबूब कि मेरा चांद निकले

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आज खो बैठे हो क्यूं अपनी पहली सी नजर
कैसा गम है जिसमें बदली है गहरी सी नजर

मेरी आंखों में जरा देखो तो मैं भी देखूं
क्यूं भला अश्क में डूबी है ठहरी सी नजर

सर उठाओ मेरे महबूब कि मेरा चांद निकले
तू करीब आके जला दे मेरी बुझती सी नजर

इस तरह चुप न रहो, मुझसे कुछ तो बोलो
कब तलक यूं छुपाओगे ये बहती सी नजर

©RajeevSingh #love shayari