शायरी – डूब गए हैं दर्द में इतना, खुद को भी हम भूल गए

डूब गए हैं दर्द में इतना, खुद को भी हम भूल गए

अपने बिखरे दिल के टुकड़े चुनना भी हम भूल गए

 

आंखों में आंसू का कतरा झांक रहा है आठों पहर

खुद में ही बंद हैं इतना, रोना भी हम भूल गए

 

इस दुनिया से रिश्ता-नाता अपना तो अब टूट गया

अपनी गलियों में भी हम आना-जाना भूल गए

 

गम ही आशना है अब और दिल मेरा है आईऩा

तू जो बिछड़ी तबसे दिलबर हंसना-संवरना भूल गए

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