शायरी – वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई

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अभी बरसात है, कभी रुकती कभी गिरती हुई
और एक शाम है भीगी हुई सी ढलती हुई

कौन जाने कि ये घटाएं कहां तक जाएंगी
जाने किस मोड़ पे बेवफा होगी हवा चलती हुई

जिस जगह कोई तलाशेगा वजूद अपना
वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई

ये फलक कितने मुसाफिरों का आशियाना है
फिर भी चिंगारियां हैं उसके दामन में जलती हुई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari