मुहब्बत शायरी

शायरी – एक गुमसुम सी फूल के खातिर मैं कांटों पे सोया

शायरी प्यासी निगाहें बरस गई, बरसी निगाहें तरस गई सावन की आई बारिश में कितनी नदियां टूट गई मेरे सागर में एक कश्ती तूफानों से डरती थी सैलाबों से लड़ते-लड़ते वो भी एक दिन डूब गई

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प्यासी निगाहें बरस गई, बरसी निगाहें तरस गई
सावन की आई बारिश में कितनी नदियां टूट गई

मेरे सागर में एक कश्ती तूफानों से डरती थी
सैलाबों से लड़ते-लड़ते वो भी एक दिन डूब गई

एक गुमसुम सी फूल के खातिर मैं कांटों पे सोया
लेकिन वो खुद से रूठी थी, हमसे भी रूठ गई

बाली उमर में बुझता चिरागां शम्मे को दर-दर ढूंढे
वो बुझा उसकी गली में, जब वो शम्मा बुझ गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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