शायरी – ऐ हुस्न तेरी अगन लगी है मेरे दिल में

new prev new next

हम कोई गैर हैं दर्द की दरिया के लिए
कितने बेताब हैं आंसू छोड़ जाने के लिए

चांद फलक पे अकेला ही है सितारों में
ऐसा कोई चाहिए तन्हाई सजाने के लिए

ऐ हुस्न तेरी अगन लगी है मेरे दिल में
रात आती है मुझे खाक बनाने के लिए

क्या खबर थी एक फूल भी चुभ जाएगी
आए थे यहां कांटों से खुद को बचाने के लिए

(फलक- आकाश)

©RajeevSingh

Advertisements

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.