तलाश शायरी

शायरी – जाने कितने बरस भटकूंगी

इस जनम में तुम मिले हो मन के सूने अंबर में चांद बनकर तुम खिले हो

love shayari hindi shayari

इस जनम में तुम मिले हो
मन के सूने अंबर में
चांद बनकर तुम खिले हो

जिन दिशाओं में हम चले हैं
तेरे साये साथ चले हैं
जिन नगरों में कोई नहीं है
वहां पे तेरे निशां मिले हैं
वीराने से इस जंगल में
तुम ही तो एक राह मिले हो
मन के सूने अंबर में
चांद बनकर तुम खिले हो

जिधर भी देखा, तुमको ही पाया
पर तेरी काया से मिल नहीं पाया
खोजा बहुत खुली नजरों से
दर्द किसी में नहीं था समाया
जाने कितने बरस भटकूंगी
जाने कहां तुम छुपे हो
मन के सूने अंबर में
चांद बनकर तुम खिले हो

Advertisements

Leave a Reply