राजीव सिंह

शायरी – तू सजना इस बरस न आया

ओझल हो रही आंखों से अब मेरे सारे सपने तू सजना इस बरस न आया कैसे पहनूं मैं गहने

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ओझल हो रही आंखों से
अब मेरे सारे सपने
तू सजना इस बरस न आया
कैसे पहनूं मैं गहने
मिलन का कंगन, प्रीत का जोड़ा
सब तेरे बिन हैं टूटे सपने

सीने की जलन कम न हुई
आंसुओं से कितना बुझाऊँ
दर्द से हो गई मैं गूंगी
हाल अपना किसको बताऊं
आंखें मेरी बिना पूछे हमसे
लगती हैं बहने
ओझल हो रही है आंखों से
अब मेरे सारे सपने

रूठी खुशियां आती नहीं हैं
खाली है मेरी झोली
पहरें मुझको भाती नहीं है
मैं हूं कितनी अकेली
ओ परदेशी इतना सता न
आजा मुझसे मिलने
ओझल हो रही आंखों से
अब मेरे सारे सपने

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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