शायरी – रात के साये में जीकर हमने जाना

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जो भी मिला बस तेरी रजा थी
कभी बावफा थी, कभी बेवफा थी

आंखों में मेरे जो आंसू भी आए
हमने ये सोचा कि तेरी दुआ थी

मेरी ये हकीकत मुझे न बताओ
कि मेरी ये किस्मत मुझसे खफा थी

रात के साये में जीकर हमने जाना
दर्द के धूप की ये अच्छी दवा थी

(बावफा- वफा के साथ)

©RajeevSingh

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