शायरी – वो ही मुझमें समाई है उदासी की तरह

new prev new next

रात खामोश है मेरे दिलबर की तरह
बड़ा सुनसान है मेरे रहगुजर की तरह

मेरे आंसू से शीशे को भी गम होता है
आईना देख रहा है मुझे पत्थर की तरह

मेरी सूरत पे ये जो मायूसी के साये हैं
वो मुझमें समाई है उदास मंजर की तरह

नींद ने आज न आने की कसम खाई है
आज फिर आंख रोएगी समंदर की तरह

©RajeevSingh

Advertisements

Leave a Reply