शायरी – हमने तुमसे इश्क ये बेपनाह क्यूं किया

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हमने बार-बार ऐसा गुनाह क्यूं किया
तुमसे इस कदर इश्क बेपनाह क्यूं किया

अपनी तलाश में मैं बहुत दूर तक गया
अपनी मंजिलों को खुद ही तबाह क्यूं किया

आंखे खुली हैं जबसे, हूं दर्द में ऐ महबूब
मुझे नींद से जगाके तूने आगाह क्यूं किया

बेखुद सा हूं तेरे इश्क में आजकल सनम
हर जर्रे को इस बात का गवाह क्यूं किया

©RajeevSingh

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