शायरी – आशिकों की ये कैसी अजीब दास्तां है

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ये शाम जवां है और गम भी जवां है
जलते हुए दिल में धुआं ही धुआं है

जवानी के मौसम में रातों का सावन
ऐसे में ऐ चांद तू कहां है, कहां है

मयखाने में टूटा, जमाने में बिखरा
आशिकों की ये कैसी अजीब दास्तां है

इस बस्ती में अब हम किधर को जाएं
यहां हर दिल पे पत्थर का निशां है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari