शायरी – मुहब्बत के समंदर में दिलदार बहुत हैं

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मुहब्बत के समंदर में दिलदार बहुत हैं
यहां कश्तियां हैं कम, पतवार बहुत हैं

इस दुनिया में बेवफाओं का एक है उसूल
वो अक्सर कहते हैं कि मेरे यार बहुत हैं

तेरे नाम की माला जपने जो कोई बैठा
उसे काटने को समाज में तलवार बहुत हैं

देख ओ जमाना चला तेरे दर से दीवाना
उसके लिए सहराओं के घरबार बहुत हैं

सहरा- वीरान जगह

©RajeevSingh # love shayari

2 thoughts on “शायरी – मुहब्बत के समंदर में दिलदार बहुत हैं”

  1. कहते हे वक़्त से पहले और किस्मत के बिना किसीको कुछ नहीं मिलता, अफ़सोस मेरे पास वक़्त नहीं और लडकियों के पास किस्मत नहीं।

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