हीर रांझा

हीर रांझा -12 – दोनों में परिचय

हीर रांझा से कहने लगी, 'मैंने ना तो तुम्हें पीटा और ना ही कुछ ऐसा कहा जो तुमको बुरा लगे'

love shayari hindi shayari

हीर रांझा से कहने लगी, ‘मैंने ना तो तुम्हें पीटा और ना ही कुछ ऐसा कहा जो तुमको बुरा लगे’

रांझा ने जवाब दिया, ‘यह दुनिया एक सपने की तरह है। ऐ खुद पर नाज पर करने वाली शहजादी, तुमको भी एक दिन यहां से जाना है। तुमको किसी अजनबी से ऐसा सुलूक नहीं करना चाहिए। किसी गरीब को नहीं दुत्कारना चाहिए। ये लो तुम्हारा बिस्तर और गद्दा, मैं जा रहा हूं…फिर कभी नहीं दिखूंगा।’

रांझा ने इतना कहा ही था कि हीर बोल पड़ी, ‘अब ये हीर तुम्हारी है। मैं अपनों के बीच भटक रही थी लेकिन मुझे कोई रास्ता दिखाने वाला अब तक नहीं मिला। लेकिन अब खुदा ने तुमको मेरे लिए भेज दिया है।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘ऐ खूबसूरत लड़की, आशिक और फकीर हमेशा प्यार के बोल से वश में आते हैं। तुम्हारे हुस्न के शराब ने मेरे होश जरूर खराब किए हैं लेकिन तुम्हारे दिल में मेरे लिए इज्जत नहीं है।’

हीर ने कहा, ‘मैं तेरी गुलाम हूं। मुझे बताओ मेरे मीत, तुम कब से इधर आए हो? क्या किसी घमंडी औरत ने तुमको घर से निकाला है? तुम क्यों यहां-वहां भटक रहे हो? तुम कौन हो? किस औरत से तुमने शादी की जिसने तुमको छोड़ दिया और जिसके लिए तुम इतने दुखी हो? तुम्हारी आंखें तो हिरन की आंखों की तरह नाजुक हैं। तुम जब बोलते हो तो फूल झड़ते हैं। मैं तुम्हारी गुलाम हो चुकी हूं। मेरे मितवा, क्या तुम मेरे पिता के यहां काम करना पसंद करोगे। तुमको भैंसों को चराना होगा। मेरे घर में तुम नौकर की हैसियत से रहोगे। क्या तुमको मेरी ये योजना पसंद है?’

रांझा बोला, ‘मैं रांझा, जात का जट हूं। तख्त हजारा से आया हूं। मैं चौधरी मौजू का सबसे प्यारा बेटा था। लेकिन पिता के मरने के बाद मेरे भाइयों ने मुझसे सब कुछ छीन लिया। अगर तुमको इस बात से खुशी मिलेगी कि मैं तुम्हारे यहां काम करूं तो तुम्हारी पलकों की छांव में रहते हुए यह जरूर करूंगा। और, तुम्हारा दिल जो चाहेगा मैं वही करूंगा। लेकिन मैं तुमसे कैसे मिल पाऊंगा? तुम तो अपने सखियों से साथ मुझे अकेला छोड़ चली जाओगी और मैं तन्हा मरता रहूंगा। कोई उपाय बताओ।’ कहानी आगे पढ़ें-

कहानी शुरू से पढ़ें

कहानी के पन्ने
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34

Advertisements

Leave a Reply