दीवाना शायरी

शायरी – कब तू मुझे समझेगी, बस यही सोचता हूं मैं

एक नजर की जुस्तजू में तुझे देखता हूं मैं कब तू मुझे समझेगी, बस यही सोचता हूं मैं करीब से गुजरती हो तो मचल उठता है दिल न जाने किस तरह रोज खुद को रोकता हूं मैं

love shayari hindi shayari

एक नजर की जुस्तजू में तुझे देखता हूं मैं
कब तू मुझे समझेगी, बस यही सोचता हूं मैं

करीब से गुजरती हो तो मचल उठता है दिल
न जाने किस तरह रोज खुद को रोकता हूं मैं

तेरे हुस्न की चांदनी में मेरा इश्क हुआ रोशन
चांद के साये को दरिया में बहुत ताकता हूं मैं

इन मदभरी जुल्फों में खो जाऊंगा एक दिन
तेरे ख्वाबों की इन रातों में, यही चाहता हूं मैं

©RajeevSingh # love shayari

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