शायरी – इस मुसाफिर का कोई दर्द तू क्या जाने

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ठोकरें खाए हैं कई, राह देखा न कभी
तुझे सोचा तो बहुत मगर समझा न कभी

रंग शीशे पे चढ़ा तो आईना वो बना
फिर खुद को आर-पार देख पाया न कभी

रात गहरी सी एक नींद की परछाई है
जिसके साये में मेरा ख्वाब सोया न कभी

इस मुसाफिर का कोई दर्द तू क्या जाने
तेरे पैरों में कोई कांटा चुभा न कभी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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