बेवफा शायरी महबूब शायरी

शायरी – टूट जाते हैं यहां पे सदियों के रिश्ते

वफा की राह पे चलती है मेरी तन्हाई दूर तक साथ ही रहती है मेरी परछाई कोई आवाज कहीं से आई ही नहीं सुन रहे थे बड़ी देर तक एक पुरवाई

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वफा की राह पे चलती है मेरी तन्हाई
दूर तक साथ ही रहती है मेरी परछाई

कोई आवाज कहीं से आई ही नहीं
सुन रहे थे बड़ी देर तक एक पुरवाई

जान बाकी ही रही तेरे दरस के खातिर
मुंतजिर मौत भी निकली बड़ी हरजाई

टूट जाते हैं यहां पे सदियों के रिश्ते
ये दौलत-दीवारों भरी दुनिया जबसे आई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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