शायरी – लगा था सीने में इश्क का खंजर

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निगाहों में खारे पानी का मंजर
कहां से है आया बहता समंदर

कभी सांस से उठता है धुआं सा
है आग जली कहीं दिल के अंदर

तुम्हारी तरफ देखा था एक पल
लगा था सीने में इश्क का खंजर

छूकर जरा तुम मुझको तो देखो
महसूस हो कि जिंदा हूं दिलबर

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari