हीर रांझा – 14 – रांझे को मिली हीर के यहां नौकरी

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हीर ने जैसे ही रांझे के बारे में पिता चूचक से बात की। वह हीर को रांझा से अलग ले जाकर मुस्कुराते हुए बोले- ‘बेटी, कौन है यह बंदा और कब आया है? यह तो बदन से इतना कोमल दिख रहा है कि छू दो तो लाली पड़ जाए। यह भैंसो की देखभाल का काम नहीं कर पाएगा। यह तो खाते-पीते घर का लग रहा है। यह खुद को भैंसों का मालिक समझ लेगा और हमारा नौकर बनकर नहीं रहेगा। उसके चेहरे पर खुदा का नूर है। क्यों न हम उसे भेड़ों की देखभाल करने का काम दें।’

हीर पिता की बात सुनकर बोली, ‘हां अब्बू, रांझा अच्छे खानदान से है। वह तख्त हजारा के चौधरी का बेटा है। वह हीरा है जो मुझे मिला है।’

चूचक बोले, ‘वह तो मासूम लड़का है जो आंखों से बुद्धिमान और देखने में विनम्र लग आ रहा है। लेकिन वह इतना उदास क्यों है और उसने घर क्यों छोड़ा? वह अपने अंदर कोई झूठ तो नहीं छिपा रहा?’

पिता के अंदर रांझा के बारे शक देखकर हीर ने उसकी जमकर तारीफ शुरू कर दी। ‘अब्बू, वह इतना पढ़ा-लिखा है कि अफलातून (प्लेटो) को भी हरा दे। वह भरी सभा में बेधड़क बोल सकता है और हजारों मामलों पर फैसला सुना सकता है। वह नदी में भैंसों को पार करा सकता है और चोरी होने पर उसे खोजकर ला सकता है। वह जान लगाकर काम करेगा। वह इस देश में हजारों में एक है जहां ज्यादातर काम करने वाले चोर हैं और अच्छे लोग कम ही हैं। वह हर हालत में अपना कर्तव्य निभाना जानता है।’

बेटी की बात सुनकर प्यार से चूचक बोले,’तुम तो बहुत जोश से उसकी वकालत कर रही हो। देखते हैं यह लड़का कैसा निकलता है? तुम्हारी बात हमें मंजूर है। हम इसके हवाले अपने भैंसों को करते हैं लेकिन उससे यह बोल दो कि भैंसों को संभालना आसान काम नहीं है।’

हीर अपने मां के पास गई और बोली, ‘मां, हम सब बहुत दिनों से जिस मुश्किल को झेल रहे थे, वह अब आसान हो गई है। अब हमारे जानवर मालिक के बिना नहीं रहेंगे और वह जंगल में रास्ता नहीं भटकेंगे। एक जाट को मैं अपनी मीठी बातों से बहलाकर, मनाकर लाई हूं। वह दिल का हीरा है। वह हमारे जानवरों का सही से देखभाल करेगा।’

इसके बाद हीर रांझा के पास आई और प्यार से उसे समझाते हुए सारी बातें बताईं। गांव के लड़के रांझा को देखकर हंसने लगे और उससे कहने लगे, ‘अब तुमको जिंदगी भर दूध और मलाई खाकर जीना पड़ेगा।’

इस पर हीर रांझे से बोली, ‘तुम इन लड़कों की कड़वी बातों का बुरा मत मानना। मैं तुम्हारे लिए मीठी रोटियां, मक्खन और चीनी लाया करूंगी। जंगल में भैंसों को ले जाना और खुदा पर यकीं रखना। मैं अपनी दासियों के साथ हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी।’ कहानी आगे पढ़ें-

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