शायरी – जुल्म करती है जब मुझपे तन्हाई

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बेवफा हो गया है दर्द मुझी से
दूर का रिश्ता हो गया खुशी से

एक बादल का टुकड़ा उड़ता था
हमने बरसते देखा उसे बेबसी से

कोई कश्ती जब किनारे लगती है
वो ठहरती है कितनी खामोशी से

जुल्म करती है जब मुझपे तन्हाई
कत्ल करता हूं अपनी बेखुदी से

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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