शायरी – है कौन सा ये शहर, जहां कोई न हमसफर

#100 दर्द शायरी

है कौन सा ये शहर, जहां कोई न हमसफर

बस्तियों में गुल खिले हैं, पर खुशबू है बेअसर

सुबहो शाम उदास है, रात रोती कराह कर

धूप निकलता शोला सा, चांदनी थोड़ी मुरझा कर

  1. तेरे इश्क में दीवाना मरता नहीं कभी
  2. माना कि तेरे हुस्न के काबिल नहीं हूं मैं
  3. कोई इल्ज़ाम न लेगी वो अपने सर पे
  4. आह और दर्द बस तेरा तलबगार हुआ
  5. तू न आई तो अधूरी है जिंदगी की गजल
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