शायरी – प्यासे तुम भी, प्यासे हम भी

#100 दर्द शायरी

प्यासे तुम भी, प्यासे हम भी

दोनों को तलाशे गम भी

 

फर्क नहीं पड़ता अब कोई

दर्द हो ज्यादा या कम भी

 

मिलते रहे हैं बस दोराहे

एक जख्म और एक मरहम भी

  1. ये इश्क आंसुओं की कहानी ही तो है
  2. मेरे खातिर तेरे दिल में दुआ भी नहीं
  3. एक गुमसुम सी फूल के खातिर मैं कांटों पे सोया
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