चाहत शायरी

शायरी – शाम भी रूठी तेरे बिना, रात भी रोयी तेरे बिना

शाम भी रूठी तेरे बिना रात भी रोयी तेरे बिना दिल को बहुत समझाया समझा नहीं तेरे बिना

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शाम भी रूठी तेरे बिना
रात भी रोयी तेरे बिना

दिल को बहुत समझाया
समझा नहीं तेरे बिना

बिस्तर पे लेटी-लेटी
नींद न आई तेरे बिना

इश्क की बातें किससे कहूं
आंख भर आई तेरे बिना

©राजीव सिंह शायरी

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