गजल शायरी

शायरी – सावन आया हर रातों में

शायरी आग ये कितनी दूर जली है हमपे ये लौ बरस रही है दूर निगाहों से होकर भी वो आंसू मुझे परोस रही है

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आग ये कितनी दूर जली है
हमपे ये लौ बरस रही है

दूर निगाहों से होकर भी
वो आंसू मुझे परोस रही है

हिलता नहीं है एक भी पत्ता
कोई आंधी तरस रही है

सावन आया हर रातों में
दुख की घटा गरज रही है


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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