शायरी – ये खामोश दर्द, ये खामोश आह

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ये बंजर सी जमीं, ये बंजर आस्मा
ये बंजर सा शमा, ये बंजर दास्तां

काली सी घटा, काली सी हवा
है काले वक्त पे कुदरत के निशां

ये खामोश दर्द, ये खामोश आह
है खामोश इश्क, बेबस है जुबां

एक कली खिली मगर टूट गई
उसे लग गई शहर की आंधियां


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari