शायरी – एक नदी की चाहत तो उस रेगिस्तां को भी है

love shayari hindi shayari

समंदर से प्यार करना कोई नदी छोड़ पाती नहीं
रेगिस्तां की तरफ भूलकर भी कभी वो जाती नहीं

एक नदी की चाहत तो उस रेगिस्तां को भी है
मगर प्यासे की प्यास कोई भी बुझाती नहीं

जहां कांटें ही हैं, फूलों का खिलना मयस्सर नहीं
वहां रेतों को सींच, कोई गुलशन बसाती नहीं

जिधर पानी अथाह, उसी के दामन को थामेगी नदी
इधर पानी नहीं, ये कमी तो कभी भर पाती नहीं

©RajeevSingh #love shayari

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