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शायरी – और आज भी वो मेरे बुरे हालात से अंजान है

शायरी सर्दी की ठिठुरती रात में फुटपाथ पर अरमान है दिलबर मुझे छोड़के किसी और पे मेहरबान है हर कदम पे जिंदगी में दर्द के निशां छोड़ते रहे जिस रास्ते से मैं गया वो आज भी सुनसान है

love shayari hindi shayari

सर्दी की ठिठुरती रात में फुटपाथ पर अरमान है
दिलबर मुझसे दूर किसी और पे मेहरबान है

हर कदम पे जिंदगी में दर्द के निशां छोड़ते रहे
जिस रास्ते से मैं गया वो आज भी सुनसान है

वो रोज देखते हैं हमें मुफलिसों के लिबास में
और आज भी वो मेरे बुरे हालात से अंजान है

दुनिया की भीड़ में जिसे तलबगार न मिला
इस अक्ल के बाजार में ये दिल बड़ा नाकाम है

©RajeevSingh #love shayari

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