हीर रांझा – 19 – हीर के मां बाप से रांझे की कहा सुनी

love shayari hindi shayari

रांझा जब गाय भैंसों को लेकर जंगल से लौटा तो देखा कि चूचक गुस्से में उसकी राह तक रहा था। चूचक ने रांझे को रिश्तेदारों के सामने ही बुरा बुरा कहना शुरू कर दिया। चूचक कहने लगा, ‘गायों को छोड़ दो रांझे और यहां से दूर चले जाओ। तुम्हारे कांड के चर्चे चारों तरफ हो रहे हैं। मैंने तुमको गायों के बीच सांढ़ बनने के लिए नौकर नहीं बनाया था। तुमको गायों को जंगल ले जाने को कहा था और तुम लड़कियों को ले जाने लगे। तुम्हारी वजह से पूरे गांव के ताने हमें सुनने को मिले हैं।’

यह सुनते ही रांझा का मिजाज भी काबू में न रहा। वह भी झल्लाते हुए चूचक से बोला, ‘खुदा करे, चोर-डकैत तुम्हारे गाय बछड़ों को ले जाएं। मैं तुम्हारे गाय भैंसों की देखभाल करता था या लड़कियों की। इतने दिनों से मैं खट रहा हूं और अब तुम बिना पैसा दिए मुझे टरकाना चाहते हो। बनिया की तरह मुझे लूट रहे हो।’

रांझा नौकरी छोड़ चला गया। लेकिन उसके जाते ही चूचक के गाय भैंसो ने खाना पीना छोड़ दिया। उनमें से कुछ जंगल में गायब होने लगे तो कुछ नदीं में डूब गए। चूचक को अब रांझा को निकालने पर पछतावा हो रहा था।

हीर अपनी मां मिल्की से बोली, ‘देखो चरवाहे के जाने के बाद गाय भैंसों की हालत कितनी खराब हो गई। लोग भी कह रहे हैं कि पिताजी ने रांझे के साथ ठीक नहीं किया।’ मिल्की पति चूचक से बोली, ‘लोग हमें पापी समझ रहे हैं। हमने चरवाहे को बिना वेतन दिए भगा दिया। जैसे ही उसने पैसे की बात की थी तुमको दे देना चाहिए था। जाओ उसे खोज लाओ।’

चूचक ने मिल्की से रांझा को मनाने को कहा। बोला ‘उससे कहो कि जब तक हीर की शादी न हो जाए वह हमारे गाय भैंसों की रखवाली करे। उसे मजा लेने के लिए छोड़ दो। किसको क्या पता है कि खुदा को क्या मंजूर है। लेकिन चरवाहे को किसी भी तरह से फिर से काम करने के लिए राजी करो।’

मिल्की हीर संग अब रांझा को तलाशने में लगी। रांझा जैसे ही मिला मिल्की उससे मीठी मीठी बातों से मनाने लगी, ‘चूचक के साथ हुए झगड़े को दिल पर मत लो। पिता और बच्चों में तो इस तरह से छोट मोटे झगड़े होते ही रहते हैं। काम पर लौट जाओ। गाय भैंसों की देखभाल भी करो और  हीर की भी सेवा करो। जबसे तुम गए हो वह हमसे नाराज रहती है। हमारी गाय भैंसे, धन दौलत, हीर, सबपर तुम्हारा हक है।’

हीर ने भी रांझे के पास जाकर कहा, ‘तुम मेरी मां की बात मान लो। अभी मेरी शादी तय नहीं हुई है। कौन जानता है कि कल ऊंट किस करवट बैठे।’

रांझे ने हीर की मां की बात मान ली और फिर से चूचक के यहां काम करने लगा। अब रांझा के लिए जंगल में हीर रोज खाना और शरबत लेकर जाती। इश्क में हीर रांझे पर अपना सबकुछ वार चुकी थी।

एक दिन जब हीर रांझा साथ थे तभी जंगल में पांच पीर फिर दिखाई दिए। रांझा पहले भी उनसे मिल चुका था। पांचों पीर का रांझा ने सर झुकाकर अभिवादन किया। पीर बोले, ‘बच्चों, हमें तुम दोनों को साथ देखकर खुशी मिली। इश्क की दुनिया को कभी मत उजाड़ना। तुम हीर के हो और हीर तुम्हारी है। तुम्हारे इश्क से जमाने में हंगामा खड़ा होगा। लोग ताने देंगे लेकिन उन सबका बहादुरी से सामना करना। खुदा को दिन रात याद करना और इश्क करना कभी मत छोड़ना।’ कहानी आगे पढ़ें

कहानी शुरू से पढे़ं

कहानी के पन्ने
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34
Advertisements

One thought on “हीर रांझा – 19 – हीर के मां बाप से रांझे की कहा सुनी”

Leave a Reply