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शायरी – मुमकिन है वो साथ न आए

शायरी मुमकिन है वो साथ न आए हाथ में उसका हाथ न आए

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मुमकिन है वो साथ न आए
हाथ में उसका हाथ न आए

अब मुझको तुम भूल ही जाओ
उनके लबों पे ये बात न आए

तेरे बिना जो कट मरती हो
ऐसी कातिल ये रात न आए

प्यास बहुत है दिल में बाकी
दो दिन की बरसात न आए

©राजीव सिंह शायरी

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