शायरी – मेरी खातिर तेरा रोना मुझे अच्छा न लगा

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मेरी खातिर तेरा रोना मुझे अच्छा न लगा
खुद को आंसू में भिगोना मुझे अच्छा न लगा

प्यार के टूटे बिखरे हुए कतरों को चुनकर
दिल में यूं दर्द पिरोना मुझे अच्छा न लगा

कभी भी मेरा जी ठीक से बहला न सका
तेरी मोहब्बत का खिलौना मुझे अच्छा न लगा

ये गहरी उदासी जब जब तेरी सूरत में देखा
तब अपना आईना सलोना मुझे अच्छा न लगा

©RajeevSingh

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