शायरी – होती नहीं आंखों से जब दर्द की बरसातें

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यूं होता हूं बेखबर, दुनिया की याद नहीं आती
खुद अपने वजूद से कोई आवाज नहीं आती

होती नहीं आंखों से जब दर्द की बरसातें
जागते हैं और रोने की ख्वाहिश नहीं जाती

रातों की तन्हाई में हम उस चांद के लिए
जलते रहे लेकिन वो कभी पास नहीं आती

बहुत दर्द से भरा था मेरे हमसफर का दिल
सुनती मगर उस तक मेरी फरियाद नहीं जाती

©RajeevSingh

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