शायरी – मिटाओ इस तरह हमको कि कोई निशां न रहे

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मिटाओ इस तरह हमको कि कोई निशां न रहे
तेरी फिजा में मेरी मोहब्बत की दास्तां न रहे

मेरी तस्वीर जो किसी कोने में तुम रखती हो
उसपे तन्हाइयों में तेरा दिल मेहरबां न रहे

आंसुओं से जो रोज ये चेहरा अपना धोती हो
उसे देखने के लिए आशिक का आईना न रहे

मैं अंधेरे में अक्सर ये सोचता रहता हूं
कि मेरी तलाश में अब कोई भी शमा न रहे

©RajeevSingh

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