शायरी – दिल जो टूटे तो कोई जख्म न जुबां पे लाए

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दिल जो टूटे तो कोई जख्म न जुबां पे लाए
कैसे फिर कोई उनके गम को समझ पाए

एक खुलते ही कई और गांठ लग जाते हैं
दिल के धागे भी उलझकर न सुलझ पाए

आप हंसते हैं मेरी हालत पर, हंसते रहिए
ये मेरा दर्द भी दुनिया का कुछ सबक पाए

जब भी खुलता है ये एक आस जगा देता है
घर के दरवाजे भी तेरे आने की कसक पाए

©राजीव सिंह शायरी

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