हीर रांझा 21 – हीर रांझे की मुलाकात पर फिर मचा बवाल

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जैसे ही रांझा ने हीर का संदेशा सुना, वह उदास हो गया। नदी में नहाकर वह बांसुरी बजाते हुए पांच पीरों को खोजने लगा। जल्दी ही वे मिल गए। रांझा रोते हुए उन पीरों के सामने हाथ जोड़ते हुए बोला, ‘मेरी मदद कीजिए नहीं तो मेरा प्यार बरबाद हो जाएगा।’

पीर बोले, ‘तुम्हारा मन बहुत व्याकुल है और तुम्हारी आत्मा परेशान है। हमारे दिल में तुमसे गीत सुनने की इच्छा जाग गई है।’ रांझा गाने लगा। रांझा की मधुर तान सुनकर पीर खुश हो गए। उन्होंने कहा, ‘जो भी चाहो मांगो, तुमको मिलेगा।’

रांझा ने कहा, हीर से मुझे मिला दो। पीर बोले, ‘हम तुम्हारी मदद करेंगे। हीर तुम्हारी है लेकिन उसके साथ तुम वैसा व्यवहार मत करना जैसा अन्य मर्द अपनी औरतों के साथ करते हैं। ना तो तुम उसे छोड़ोगे, ना ही उसके मां बाप के घर से भगाओगे क्योंकि वह अनाथ या लाचार नहीं है। हीर के अलावा किसी दूसरी औरत पर नजर मत डालना।’

रांझा पीर से विदा लेकर चला। हीर और रांझा अपने प्यार को छुपाते हुए सबसे छुप छुप कर मिलने की कोशिश करने में लग गए। उन्होंने सहेली मीठी को विश्वास में लेकर उसी के घर मिलने का फैसला लिया। इसके लिए रांझे ने मीठी को पैसे दिए जिससे वह खुश हो गई और मदद को तैयार हो गई। मीठी का घर हीर के गांव के कोने पर उस तालाब के किनारे पर था जहां पशु पानी पीने आते थे। मीठी ने अपने घर में दोनों के मिलने का सारा बंदोबस्त कर दिया। हीर रात को चुपके से रांझा से मिलने आती और रात के तीसरे पहर घर लौट जाती। सुबह रांझा भैंसों को लेकर जंगल निकल जाता। चेनाब नदीं के किनारे हीर सहेलियों के साथ नहाने के बहाने आती, जहां दोनों की फिर मुलाकात होती। रांझा बांसुरी बजाता और हीर सहेलियों संग चेनाब के गीत गाती।

इन सारी बातों की खबर जब दूसरे चरवाहों को हुई तो उन्होंने जाकर हीर के शैतान चाचा कैदु के कान भर दिए। कैदु हीर की मां मिल्की के पास गया और फिर उलाहना देने लगा। ‘तुम्हारी बेटी बेटियों के नाम पर कलंक है। वह चरवाहे के साथ चेनाब नदी में खेलती है। उसने गांव को बदनाम कर दिया। हीर को अब रोकना ही होगा।’

मिल्की ने कुछ लोगों को हीर को बुलाने भेजा। उन्होंने हीर से जाकर कहा, ‘तुम्हारी मां बहुत गुस्से में है। चूचक और घर के बड़े लोग तुमसे खफा है, वो न जाने तुम्हारे साथ क्या करेंगे।’ रांझा को भी उन्होंने कहा, ‘मिल्की ने तुमको मरवाने की धमकी दी है। पूरे सियालों का गांव क्रोधित है, वे तुमको मार डालेंगे।’

हीर मां के पास आई तो मिल्की उसपर चिल्लाने लगी, ‘बेशर्म, बदचलन, वेश्या। तुम उससे जंगल में मिलकर खेल कर रही हो और गांव की गली गली में तुम्हारे करतूतों का शोर मचा हुआ है।’

हीर भी मां की बात सुन ताव में आ गई, ‘झूठ बोल रहे हैं सब। तुम भी बात को बढ़ा चढ़ाकर बोलती जा रही हो। इन सबमें क्या रखा है? हां, रांझा भी जंगल में था, मैं भी अपनी सहेलियों के साथ वहां घूम रही थी। मैंने किसी का क्या बिगाड़ा है, ये सब तूफान किसलिए? हर तरफ यह चर्चा कौन फैला रहा है? मां, मैं रांझा को नहीं छोड़ सकती। अगर दादा के दादा भी आके कहें तो भी वे मुझे मजबूर नहीं कर सकते।’

बेटी की बात सुनकर मिल्की चुप हो गई। वह समझ गई कि रांझा के साथ रहने का हीर प्रण कर चुकी है और उसके दिल में अब मौत का भी भय नहीं है। यह सब देखकर कुटिल कैदु लंगड़ाते हुए गांववालों के पास पहुंचा और दुष्ट बोला, ‘तुमलोग मूर्ख हो। मेरी सलाह पर गौर क्यों नहीं करते। मेरे अलावा तुमलोगों को भलाई की बात कोई और नहीं बता सकता। हीर दिनभर जंगल में रांझे की बाहों में रहती है। अगर तुमलोगों ने इस पर कुछ नहीं किया तो एक दिन वह उसके साथ भाग जाएगी और तुमलोग सियालों की इज्जत मिट्टी में मिलते देखोगे।’ कहानी आगे पढ़ें।

कहानी शुरू से पढ़ें।
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