हीर रांझा 22 – पिटाई से बौखलाया कैदु ने रची दोनों के खिलाफ साजिश

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हीर की सहेलियों ने आकर उसे कैदु की शैतानियों के बारे में बताया। ‘तुम्हारा दुष्ट चाचा गांव के बड़े बुजुर्गों को तुम्हारे खिलाफ भड़का रहा है। तुम्हारे और रांझा के प्रेम का बाजार में ढोल पीट रहा है। हम मिलकर उसे ऐसा सबक सिखाएंगे कि जिंदगीभर याद रखेगा।’ हीर राजी हो गई और सहेलियों संग सलाह करने लगीं। कैदु को सबक सिखाने की योजना बन गई।

हीर और सहेलियां कैदु को घेरने का अवसर तलाशने लगीं। इंतजार करते करते आखिर वह वक्त भी आ ही गया। सबने कैदु को उसके ही घर में ऐसे पकड़ा जैसे धोबी गधे को पकड़ता है। सबने कैदु को ऐसे पीटना शुरू किया जैसे लोहार लोहे को पीटता है। उन्होंने उसके बाल खींचे और मुंह पर कालिख मल दिया।

कैदु उस चोर की तरह चिल्लाता रहा जो सिपाही के हाथ लग गया हो और सिपाही उसे जमकर पीट रहा हो। सबने मिलकर उसकी झोपड़ी को जला दिया। झोपड़ी से उठती आग की लपटें हीर और उसकी सहेलियों के लिए विजय पताका की तरह लहरा रही थीं। उस रोशनी में उनके सूरतें और भी चमक उठीं।

उधर फटे कपड़ों में मार खाया कैदु बड़ों की सभा में रो रोकर गुहार लगाने लगा, ‘मुझे इंसाफ चाहिए। इंसाफ दो मुझे। उन लोगों ने मेरी झोपड़ी जला दी। मेरे बर्तन तोड़ दिए। मुझे मारा। मैं पूरी दुनिया के सामने सबकी शिकायत रखूंगा। काजी से इंसाफ मांगूंगा।’

कैदु की बात सुन हीर का पिता चूचक गुस्से में आकर उससे बोला, ‘भाग जाओ यहां से दुष्ट, तुम ठगों के सरदार हो। तुम पहले लोगों को तंग करते हो और फिर पंचायत करने चले आते हो। तुम लड़कियों को परेशान करते हो इसलिए तुम्हारे साथ ऐसा हुआ।’

वहां लड़कियों को बुलाकर पूछा गया कि उन्होंने कैदु को क्यों मारा? क्या उसने कुछ बुरा किया था? लड़कियों ने कहा, ‘यह बदमाश हमारे गालों को छूता है और हमारी बाहें मरोड़ता है। हम कहां जाते आते हैं, इसकी जासूसी करके हमारा ऐसे पीछा करता है जैसे गाय के पीछे सांढ़ जाता हो।’

इसके बाद मिल्की की मां से हीर और उनकी सहेलियां कहने लगीं, ‘कैदु पागल कुत्ते जैसा है। इसे हम दूर क्यों नहीं भगा देते? हमें उससे डर लगता है। वह हमारे साथ बुरा बर्ताव करता है और आपलोग उससे प्यार से बातें करते हो। हमें बार बार जिसकी वजह से बड़ों की सभा में आना पड़ता है, ऐसे दुष्ट झगड़ालू आदमी के प्रति आपलोग दयालु क्यों बन रहे हैं? यह तो इंसाफ नहीं है।’

कैदु फिर और जोर से रोने चिल्लाने लगा और इंसाफ की मांग करता रहा। सभा में लोगों ने कैदु को शांत होने को कहा। उनका मानना था कि कैदु के साथ लड़कियां कुछ ज्यादा ही कठोरता से पेश आई हैं। उन्होंने लड़कियों को डांटा और कैदु से वादा किया कि उसका घर फिर से बना दिया जाएगा। उसके बर्तन सहित अन्य नुकसान की भी भरपाई कर दी जाएगी।

लेकिन कैदु को इस फैसले से संतोष नहीं हुआ। वह कहने लगा, ‘आप लोगों ने अपनी बेटियों की तरफदारी की है और मुझे ऐसी तुच्छ सांत्वना दे रहे हो। ये तो अंधे राजा और दमन करने वाले अधिकारियों के राज्य जैसा इंसाफ है।’

इस पर हीर का पिता चूचक बोल पड़ा, ‘हमारे गांव  के बड़े बुजुर्ग नीच नहीं हैं। उन्हें ईश्वर का खौफ है। हम कभी नाइंसाफी नहीं करते। शैतान से हमें नफरत है। तुम्हारी कहानी की सच्चाई पर आंखों से देखने पर ही यकीन किया जा सकता है। अगर वह सच्ची निकली तो हीर को काट कर फेक देंगे और रांझे को गांव से निकाल देंगे।’

कैदु मन ही मन कहने लगा, ‘मैं तो उस हीर को भांग की तरह पीस दूंगा और उस रांझे के बालों से रस्सियां बनाऊंगा।’ फिर वह बोला, ‘हां चूचक, अगर तुमने खुद अपनी आंखों से देखने के बाद अगर अपनी बेटी को कुछ नहीं कहा तो तुम इस सभा में बैठे सभी लोगों को झूठा साबित करोगे।’

वहां से जाने के बाद कैदु जंगल में हीर रांझा को एक साथ पकड़ने की योजना बनाने लगा। वह रांझा पर नजर रखने लगा। दूसरे दिन रांझा सुबह जब पशुओं को लेकर जंगल की ओर चला तो कैदु भी झाड़ियों के पीछे छिपकर उसका पीछा करता रहा। दो पहर बाद हीर अपनी सहेलियों के साथ जंगल आईं। जंगल सियाल की लड़कियों की खूबसूरती से चहकने लगा। कुछ देर खेलने के बाद सहेलियां घर लौट गईं लेकिन हीर रांझे के साथ नर्म घास पर लेटी बातें करती रहीं।

मौका पाकर झाड़ियों के पीछे छिपा कैदु तुरंत वहां से तेजी से दौड़ता हुआ गांव पहुंचा और बड़ों के पास जाकर कहने लगा, ‘चलो, खुद अपनी आंखों से देख लो, जंगल में क्या तमाशा चल रहा है।’ कहानी आगे पढ़ें

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