शायरी – क्यों रोते हैं सब मेरी जिंदगी के मुस्कुराने से

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सोचा मगर समझ न सका ये राज जमाने से
क्यों रोते हैं सब मेरी जिंदगी के मुस्कुराने से

अपना दुखड़ा ही रोते रहते हैं रिश्तेदार मगर
वो खूब हंसते हैं अपनों के बरबाद हो जाने से

किस बात की जलन दिलों में पालते हैं लोग
क्या मिलता है उन्हें दूसरों का घर जलाने से

जिनको बहुत कुछ पाकर भी खुश नहीं देखा
वो मेरी फकीरी पर बाज नहीं आए झल्लाने से

©राजीव सिंह शायरी

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One thought on “शायरी – क्यों रोते हैं सब मेरी जिंदगी के मुस्कुराने से”

  1. bedardo ki bhid me
    koi hamdard chahiye..
    Katti ni akele ye jindagi ka safar..
    Jindagi ki naiya par krne ke liye,koi to sathi chahiye..

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