शायरी – जुर्म यहां छुपना है मुश्किल

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जो उस खुदा का बंदा होगा
दुख में भी भला चंगा होगा

जुर्म यहां छुपना है मुश्किल
मुजरिम कभी तो नंगा होगा

दिल का जब भी राज चलेगा
फिर कैसे कहीं पे दंगा होगा

सच्ची राह जो शख्स है चुनता
उसका दुनिया से पंगा होगा

©राजीव सिंह शायरी

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