राजीव सिंह

शायरी – खरीदते हैं वो जो मिल न सका प्यार में

खरीदते हैं वो जो मिल न सका प्यार में खड़े हैं आज सब हसरतों के बाजार में रिश्तों के कलह में हुआ ऐसा बुरा हाल जीना दूभर किया घर के दरो दीवार ने

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खरीदते हैं वो जो मिल न सका प्यार में
खड़े हैं आज सब हसरतों के बाजार में

रिश्तों के कलह में हुआ ऐसा बुरा हाल
जीना दूभर किया घर के दरो दीवार ने

हर बार जाने क्यों आखिर में दुख मिला
चाहा तो था खुशी दिल के कारोबार में

उम्र गुजरी तो एक दिन ये मालूम हुआ
कि हर चीज बुलबुला है इस संसार में

©राजीव सिंह शायरी

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