शायरी – तेरी मोहब्बत में ग़र परेशान नहीं होता

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तेरी मोहब्बत में ग़र परेशान नहीं होता
तो मैं पहले से बेहतर इंसान नहीं होता

बहुत दिनों तक तेरे गम में पागल रहा
उस हालात में कोई मेहरबान नहीं होता

तनहाई में खूब रोया तो अहसास हुआ
तेरा दिल रोनवालों पे कुरबान नहीं होता

टूटकर गिरा जब तो जाना है हमने कि
मोहब्बत के तारे का आसमान नहीं होता

भटकता हुआ एक जमीं तलाश रहा हूं
मगर मंजिल को पाना आसान नहीं होता

©राजीव सिंह शायरी

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