हीर रांझा

हीर रांझा 23 – दोनों के प्रेम का भेद खुला, शादी का प्रस्ताव लेकर आए खेरा

हीर को अहसास हो गया उसके पिता आ रहे हैं। उसने रांझा से कहा, 'उठो, पिताजी आ रहे हैं।' वह रोने लगी, 'मैं फिर तुमसे मिलने नहीं आ पाऊंगी, मुझे माफ कर देना।'

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जंगल में हीर और रांझा के होने की बात कैदु ने जाकर गांववालों को बताई और साथ चलने को कहा। हीर का पिता चूचक उसकी बात सुनकर ताव में आ गया। उसे लगा कि गांव वालों के सामने उसे जलील होना पड़ा है। भाला लेकर वह घोड़े पर चढ़ा और तेजी से जंगल की ओर चला।

जंगल चूचक के घोड़े की टापों से थर्रा उठा। हीर को अहसास हो गया उसके पिता आ रहे हैं। उसने रांझा से कहा, ‘उठो, पिताजी आ रहे हैं।’ वह रोने लगी, ‘मैं फिर तुमसे मिलने नहीं आ पाऊंगी, मुझे माफ कर देना।’ और वह रांझा के पास से हट गई।

जंगल में हीर रांझा को अकेले पाकर चूचक गुस्से में जलने लगा। उसका दिल शर्मिन्दगी से भर गया। वह चिल्लाया, ‘ये देखो, लड़की तो जंगल में अकेली घूम रही है। मैं तुम्हारा सर काट दूंगा तभी तुम्हारा यह खेल रुकेगा।’

हीर रांझा से कहने लगी, ‘तुम भैंसों को यहीं छोड़ दो और अपने घर लौट जाओ। अब तुम्हारे लिए कोई खाना नहीं लाएगा, तुम्हारी देखभाल यहां कोई नहीं करेगा। पिताजी, जो कुछ भी हुआ उसके लिए मैं माफी चाहती हूं। मैं आपकी प्यारी बेटी हूं और यह ठीक नहीं है कि मेरी वजह से आपकी और बदनामी हो।’ चूचक गुस्से में वहां ऐसे खड़ा था जैसे भांग के नशे में हो। चूचक ने हीर की शादी करने की ठानी।

रांझा के चरवाहे बनने की खबर तख्त हजारा में उसके घर तक पहुंची तो उसके भाई और भौजाई उसे वहां से ले जाने के लिए चिट्ठी पर चिट्ठी लिखने लगे। जब चूचक को पता चला कि रांझा तख्त हजारा के मौजू चौधरी का बेटा है तो वह उलझन में पड़ गया। उसने रांझा को वापस तख्त हजारा नहीं भेजा। रांझा भी वहां जाना नहीं चाहता था।

चूचक हीर की शादी के लिए बेचैन रहने लगा। वह हमेशा इसी के बारे में सोचता रहता। उसने अपने सगे संबंधियों और जाति के लोगों को हीर के लिए रिश्ता खोजने को कहा। वह फैसला नहीं कर पा रहा था कि हीर की शादी रांझा से कर दे या किसी और से।

बदनामी को खत्म करने के लिए यह शादी जल्दी होनी थी। रांझा से शादी की बात पर चूचक के रिश्ते के लोग तैयार नहीं हुए। वे कहने लगे कि रांझा नीची जाति का है और सियालों की बेटियां कभी रांझाओं से ब्याही नहीं गई। उन्होंने खेरा के जाट से शादी का प्रस्ताव किया और चूचक से कहा कि इस रिश्ते से उनकी इज्जत बढ़ेगी।

खेरा की तरफ से शादी का प्रस्ताव आया और रिश्तेदारों से सलाह कर चूचक ने सगाई का ऐलान कर दिया। घर में ढ़ोल बाजे बजने लगे, शादी का माहौल दिखने लगा। खेरा भी इस रिश्ते पर खुश हुए। उन्होंने भी जश्न मनाया। रांझा इससे दुखी था।

उधर हीर भी मां से खफा थी कि उसकी मर्जी के खिलाफ यह सब हो रहा था। उसने मां से कहा, ‘तुम लोग ठीक नहीं कर रही हो। एक हंस को उल्लू के हाथों सौंप रही है। एक परी सांढ़ के साथ कैसे जिंदगी गुजार पाएगी?

मौका देखकर हीर रांझे से मिली। रांझे से कहा, ‘हम दोनों पर यह कैसा कयामत बरपा है। चलो, कहीं दूर चलते हैं। एक बार मैं यहां से खेरा के घर गई तो कभी लौट नहीं पाऊंगी। हम दोनों ने प्यार की इस जंग को लड़ने के लिए बहुत कुछ किया है। हम सच्चे प्रेमी हैं और यह जंग लड़ना हम छोड़ नहीं सकते।’

रांझा हीर के बातों से सहमत नहीं हुआ। वह कहने लगा कि प्यार को कभी भी चोरी या अपहरण करके हासिल करना ठीक नहीं है। ‘हीर, तुम मुझसे उस चोर की तरह भागने की सलाह दे रही हो, जो चोरी करते पकड़ लिया गया है।’

हीर की सहेलियां रांझा से मिलने पहुंची और उसे ताना देने लगी। ‘ये सब अच्छा लग रहा है तुमको। इधर तुम भैंसो को चराने में दिन रात व्यस्त रहते हो उधर हीर की शादी की तैयारियां चल रही हैं। अगर यही करना था तो फिर प्यार क्यों किया?’

रांझा ने लड़कियों से कहा, ‘देखो, इन सब बातों में क्या रखा है? मुसीबत आए तो धैर्य से उसका सामना करना चाहिए। अगर ईश्वर की इच्छा होगी तो खेरा और सियाल का यह रिश्ता नहीं हो पाएगा। तुमलोग प्यार के बारे में कुछ नहीं जानती। दिल में धीरज रखने से ही प्यार की दुनिया में जीत होती है।’

रांझा का जवाब सुनने के बाद लड़कियां हीर के पास लौटीं और कहने लगीं, ‘तुमने इस प्यार को गंभीरता से नहीं लिया। तुमने उसके भरोसे को तोड़ा है। वह गांव छोड़ने की तैयारी कर रहा है। अगर यही करना था तो रांझा को प्यार के लिए बढ़ावा नहीं देना चाहिए था। तुम्हारी वजह से उसका दिल टूटा है। वह तुम्हारी खातिर दुनिया के ताने सुन रहा है और तुम उसपर जुल्म कर रही हो।’

हीर ने सहेलियों से रांझा को लड़की के वेश में छुपाकर लाने को कहा। ‘उसे मेरे पास ले आओ। मेरे मां बाप को पता न चले। तुमलोगों के सामने यह फैसला हो जाएगा कि किसने भरोसा तोड़ा है और कौन प्रेम में सच्चा है। मैंने तो रांझे को साथ भागने को कहा लेकिन वह नहीं माना। अब गांव में रहकर ताने क्यों सुन रहा है?’

एक रात रांझा को लड़कियों के कपड़े पहनाकर सहेलियां उसे हीर के पास ले आईं। दोनों प्रेमियों का एक बार फिर आमना सामना हुआ। दोनों ने एक दूसरे से सच्चा प्रेम करने की बात दोहराई। कहानी आगे पढ़ें।

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