हीर रांझा 25 – ससुराल में उदास हीर, दर दर भटका रांझा

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धोखे से शादी कराने के बाद हीर को अब डोली में बैठने के लिए मजबूर किया गया। खेरा उसे सियाल से रंगपुर उसी तरह ले चले जैसे चोर पशुओं को चुरा कर ले जाता है। डोली में बैठी हीर रांझा के लिए रोए जा रही थी, ‘मेरे रांझा, आज खेरा के लोग तुम्हारी अमानत को लूटकर ले जा रहे हैं। सियालों की जो तुमने अब तक सेवा की उसके बदले तुम्हें यह सिला मिला। अब तुमसे दूर जा रही हूं तो तुम्हारी देखभाल कौन करेगा? तुम दुखी और अकेले होकर भटकते फिरोगे। ओ रांझा, जमीं आसमा हमारा दुश्न हो चुका है और मौत देने पर तुला है।’

इस तरह रांझा से जुदा होकर हीर विलाप किए जा रही थी। हीर को पालकी में लेकर लौटती बारात जंगल तक पहुंची तो सभी कुछ खाने पीने सुस्ताने के लिए वहीं रुक गए। लोग शिकार पर जाने की भी तैयारी करने लगे। रांझा भी हीर की बारात का पीछा करते हुए जंगल में ही था। उसका दिल दर्द से फटा जा रहा था।

शिकार को लोगों ने जंगल में ही आग में भूना और खाते हुए सभी जश्न मनाने लगे। इस बीच मौका देखकर हीर ने रांझा को पालकी के पास बुलाया और गले से लगा लिया। किसी की नजर दोनों पर पड़ गई और उसने जाकर सबको बताया। सभी रांझा को पकड़ने के लिए लपके लेकिन हीर ने सबको रोक दिया। उसने कहा कि रांझा को उसने किसी काम से बुलाया था और किसी ने उसे हाथ लगाया तो वह जहर खा लेगी। खेरा वाले चुप रह गए।

बारात जंगल से चली और रंगपुर पहुंची। वहां दुल्हन के स्वागत के लिए महिलाएं पहले से इंतजार कर रही थीं। गीत गाते हुए लड़कियों ने पालकी का पर्दा हटाया। हीर को घर के अंदर ले जाया गया। सास और ननद हीर के बगल में आकर बैठी। लोग उपहार देने आने लगे। इतनी खूबसूरत बहू लाने के लिए सास को बधाइयां मिलने लगीं।

रांझा भी रंगपुर पहुंचा। हीर और रांझा के दिल में कैसा हंगामा मचा था इसे सिर्फ वही दोनों जान रहे थे। रांझा चुपके से हीर के पास पहुंचा लेकिन हीर ने इसका विरोध किया। हीर ने कहा कि किस्मत उन दोनों के साथ नहीं है और वह रांझा के लिए कुछ नहीं कर सकती। इस पर रांझा हीर को उलाहना देने लगा। कहने लगा कि हीर ने पहले उसको प्यार के लिए बढ़ावा दिया और अब वह उसे छोड़ रही है। इस पर हीर उसे समझाने लगी कि दोनों का प्यार हमेशा रहेगा।

हीर ने रांझा से वादा किया कि वह कभी सैदा की नहीं हो सकेगी। अगर कभी वह उसके पास आया तो वह मुंह फेर लेगी। ‘सुनो रांझा, मैं तुमसे मिलती रहूंगी। मेरे पास एक योजना है। मैं तुमको जब जब बुलाऊंगी, तुम फकीर के वेश में मुझसे मिलने आना। तुम फकीर बनकर इसी गांव में रहो। तुम मुझे देख पाओगे और मैं तुमको। देखो, अगर तुम इस जगह से जाओगे तो मैं मर जाऊंगी।’

रंगपुर की महिलाओं ने जब हीर को उदास रहते देखा तो वह बहुत नाराज हुईं। दुल्हन के आने की खुशी में किए जा रहे रीतियों में भी हीर कोई खुशी नहीं दिखा रही थी। हीर की आंखों से आंसू टपकते रहते थे। इधर काजी चूचक को बता रहा था, ‘तुम्हारी खुशनसीबी कि सारी मुसीबतें एक साथ टल गईं। हीर ससुराल चली गई। सियाल में भी अब शांति है। रंगपुर भी चहक रहा है। और रांझा पर अब कोई ध्यान नहीं देता।’

तख्त हजारा में रांझा के भाइयों और भौजाइयों को जब उसकी कहानी के बारे में पता चला तो वे उस पर हंस रहे थे। उन्होंने बुलावा भेजा, ‘रांझा, घर लौट जाओ। दुनिया की कोई लड़की वफादार नहीं होती। खेराओं ने उस फूल को तोड़ लिया जिसे तुमने बाघ सिंहों से भरे जंगल में खिलाया था। जिसकी रक्षा में तुम इतने दिन लगे रहे और अब भटक रहे हो। हम तुम्हारी खुशी के लिए सब कुछ करेंगे। आ जाओ।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘जब पतझड़ आता है तो गाने वाली चिड़िया आशा पर जिंदा रहती है कि बहार फिर आएगी। जब बाग सूख जाता है तो बुलबुल जंगल में भटकती फिरती है कि कहीं उसके लिए कोई फूल जरूर खिला होगा। सच्चा प्यार करने वाले कभी हार नहीं मानते।’ भौजाइयों को जब रांझा का संदेशा मिला तो वह समझ गईं कि वह अब कभी वापस नहीं लौटेगा।

रांझा फकीर बन गया। उसने कान छिदवा लिए और कसम खायी कि या तो वह हीर को कैद से निकालेगा या मिट जाएगा। उधर, ससुराल में हीर ने गहना श्रृंगार त्याग दिया था। वह ठीक से खाना भी नहीं खाती थी और हमेशा रांझा को यादकर रातों को जागती रहती थी।

हीर की ननद का नाम था सेहती। वह हीर से कहती, ‘भाभी, किसने काला जादू कर दिया है तुम पर। तुम दिन पर दिन कमजोर होती जा रही हो। तुम्हारी खूबसूरती मुरझाती जा रही है। तुम सूखी टहनी बन गई हो और बदन की हड्डियां निकल आई हैं। इतनी उदास क्यों रहती हो तुम? मुझे अपना कष्ट बताओ। हो सकता है, मैं तुम्हारी मदद कर सकूं।’ तब हीर ने ननद सेहती को रांझा से इश्क और धोखे से हुई शादी की सारी कहानी बताई। सेहती ने हीर के दर्द को समझा। उसने कहा, ‘मेरा भी एक प्रेमी है। मुराद बख्श नाम है उसका। ऊंट की देखभाल करता है। हम दोनों मिलकर तुम्हारे लिए जो कर सकते हैं, करेंगे।’

अब तक हीर ने सैदा को पास नहीं आने दिया था। एक रात सैदा बहुत खुश होता हुआ हीर के बिस्तर पर गया। लेकिन हीर ने उसे झिड़क दिया। सैदा नहीं माना। वह हीर से जबरदस्ती करने पर उतारू हुआ। तब हीर पांचों पीरों को बुलाने के लिए प्रार्थना करने लगीं। तभी वहां पीर प्रकट हुए तो हीर ने कहा, ‘मुझे बचा लीजिए, मैं रांझा के सिवा किसी और की नहीं हो सकती।’ पीरों ने सैदा के हाथ पैर बांध दिए। सैदा गिड़गिड़ाकर माफी मांगने लगा। ‘मुझसे भूल हो गई। मुझे माफ कर दीजिए।’

हीर दूसरे दिन नहाने के बाद सिर झुकाए उदास बैठी थी। अचानक सोचती सोचती वह जाने कहां खो गई। वह पीरों का ध्यान करने लगी। पीर उसके ध्यान को देखकर रह नहीं पाए और फिर उसके पास आए। उन्होंने पूछा, ‘बेटी, उठो, कौन सा दुख तुमको खाए जा रहा है।’

हीर बोली, ‘आपने रांझा से मुझे मिलवाया। उसका प्यार दिलाया। मैं रांझा की याद में पागल हो रही हूं। खत्म होती जा रही हूं। खुदा ने आपको इश्क का मददगार बनाया है।’ इस पर पीरों के दिल में हीर के लिए करुणा उमड़ पड़ी और उन्होंने हीर से कहा, ‘उदास मत हो। वह तुमसे जल्दी ही मिलने आएगा। यही खुदा की इच्छा है।’ कहानी आगे पढ़ें।

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