हीर रांझा 26 – हीर का संदेशा मिलते ही रांझा जोगी बनने चला

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देखते देखते एक साल गुजर गए। हीर ससुराल में उसी तरह उदास रहती थी। रंगपुर की एक महिला मायके सियाल जा रही थी। वह हीर से बोली कि अगर माता पिता को कुछ संदेशा भेजना हो तो वह पहुंचा देगी। ‘मुझे बताओ, पति के साथ तुम्हारा रिश्ता कैसा चल रहा है, मैं तुम्हारा सारा हाल तुम्हारे मां बाप तक पहुंचा दूंगी।’

हीर ने कहा, ‘पति तो मेरे लिए कांटों की सेज है। मेरी किस्मत खराब है। मैं कर ही क्या सकती हूं। मेरे घरवालों को हाथ जोड़कर मेरा सलाम कहना। उनको बताना कि उन्होंने अपनी बेटी को दुश्मनों के हाथ में सौंप दिया है। तुम रांझा से मिलकर कहना कि मेरे पास चला आए वरना मेरी जान निकल जाएगी। मैं उससे मिलने की रोज दुआ करती हूं।’

वह महिला सियाल गई तो उसने रांझा को खोजना शुरू किया। उसने वहां लड़कियों से पूछा, ‘वो लड़का कहां गया जो चूचक के पशुओं को चराता था। वह जो तख्त हजारा से आया था। वो रांझा जिसकी हीर को खेरावाले छीन ले गए और जो प्यार में पागल बना फिरता है।’

लड़कियों ने जवाब दिया, ‘उसने तो संसार त्याग दिया है। वह जंगल में भटकता फिरता है। कोई उससे बात नहीं करता। तुमको वह मिल जाएगा। तुम ही उससे बात करना। हम सबका उस पर कोई वश नहीं है।’

आखिरकार उस महिला ने रांझा को खोज लिया। उसने कहा, ‘हीर तुम्हारे लिए मरी जा रही है। उसकी अंतिम सांसें उसके होठों पर अटकी हुई है। तुमने उस पर जादू कर दिया है। वह अपने पति से बिल्कुल प्यार नहीं करती। सैदा ने उसको खुश करने की बहुत कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाया। वह सैदा को अपने पास फटकने तक नहीं देती। वह रातों को तारे गिनते हुए तुम्हारे बारे में सोचती रहती है। तुम जोगी बनकर रंगपुर जाओ और उससे मिलने की कोशिश करो। खुदा ने चाहा तो तुम लोगों का मिलन होकर रहेगा।

रांझा ने जब हीर का संदेशा सुना तो उसका सारा दर्द खुशी में बदल गया। उसने अपना संदेशा पत्र में लिखकर हीर तक पहुंचाने के लिए उस महिला को दिया। पत्र में लिखा, ‘हीर मैं कैसे कहूं कि तुमसे जुदाई को मैं कैसे सह रहा हूं। तुमको तो नया घर मिला। लेकिन मैं जलते अंगारों पर चलता हूं और कांटों पर सोता हूं। प्रेम की अगन एक बार लग जाती है तो जमीं आसमा जल जाते हैं। तुमने मुझे अपने करीब लाने के लिए घर वालों को धोखे में रखकर नौकरी पे रखवाया। तुम औरतें इतनी चतुर होती हो कि आसमान के सितारे भी तोड़ लाती हो। मेरा अब कोई ख्याल नहीं रखता और तुमने भी मुंह फेर लिया है। मेरी जिंदगी से मोर उड़ चुके हैं और उल्लुओं के बीच मैं रह रहा हूं।’ इस तरह रांझा ने पत्र में हीर से खूब दिल खोलकर शिकायतें लिखीं।

रांझा के दिल में प्यार की शहनाइयां बजने लगीं। वह हीर से मिलने को बेचैन हो गया। वह सोचने लगा, ‘गहरे नदी में पानी की लहरें कितनी ही तेज हों, कश्ती को तो उस पार जाना ही होगा। हीर से मिलने के लिए जान भी देनी पड़े तो वह मंजूर है। मैं अपने शरीर पर राख मलकर जोगी बनकर उससे मिलने जाऊंगा। मैं किसी फकीर को खोजने निकलता हूं जो मेरा भाग्य बदल दे।’ कहानी आगे पढ़ें।

कहानी शुरू से पढ़ें।
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