शायरी – वहां इश्क का परिंदा उड़ता है बेखबर सा

new prev new shayari pic

लगता है उसका घर एक आजाद शहर सा
वहां इश्क का परिंदा उड़ता है बेखबर सा

घर में हर तरफ खड़ी हैं तनहाई की दीवारें
सुकूं से रहता है वो मोहब्बत भरे बशर सा

उसके लिए दुनिया कातिलों का कारवां था
आईना ही बना था वफादार हमसफर सा

बेवफाओं से दूर वो जिंदगीभर भागता रहा
दिल को था बनाया उसने अपना रहबर सा

बशर – इंसान, रहबर – राह दिखाने वाला

©राजीव सिंह शायरी

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.