हीर रांझा 27 – बालनाथ के पास जाकर जोगी बना रांझा

new prev new shayari pic

रांझा जोगी बनने टिल्ला की पहाड़ियों की ओर चला जहां जाने माने फकीर बालनाथ रहते थे। रांझा ने खुद से कहा, ‘बालनाथ जरूर मुझे मुक्ति का मार्ग दिखाएंगे।’ कई दिनों की यात्रा के बाद रांझा टिल्ला पहुंचा और वहां बालनाथ के आगे जाकर सिर झुका लिया। वहां पर पहले से बहुत सारे चेले बैठे थे। वे सब ईश्वर की प्रार्थना कर रहे थे और गीता भागवत महाभारत पढ़ रहे थे।

रांझा ने बालनाथ से फकीर बनने की इच्छा जाहिर की। उसने कहा, ‘मुझे अपना चेला बना लीजिए और आप मेरे पीर बन जाइए।’ बालनाथ रांझा की बात सुनते रहे और उसे ध्यान से देखते रहे। उन्होंने कुछ देर सोचा और फिर कहा, ‘तुमको देखकर मुझे ऐसा लग रहा है कि तुम सांसारिक हो और मालिक बनने की योग्यता रखते हो, सेवक नहीं। तुमको दुनिया में लोगों के बीच रहकर ही काम करना चाहिए। तुम्हारे अंदर ऐसा फकीर नहीं दिख रहा जिसका आदेश सब माने। फकीर बनने के लिए पवित्र आत्मा के साथ साथ पूर्ण समर्पित होने की भावना भी जरूरी है। तुम सजते संवरते हो, बांसुरी बजाते हो, स्त्रियों पर टकटकी लगाते हो। तुम एक गुरू को धोखा नहीं दे सकते। मुझे सच सच बताओ। ऐसा क्या हो गया तुम्हारे साथ कि सारा सुख भोग छोड़कर फकीर बनना चाहते हो। फकीरी का रास्ता बहुत दुखभरा है।’

बालनाथ बोलते रहे, ‘फकीर बनोगे तो वैसा कपड़ा पहनना पड़ेगा। भीख मांगना पड़ेगा। तुम जिंदगी की खुशी और अपनों की मौत का गम नहीं मना सकोगे। स्त्रियों की तरफ नजर नहीं उठा सकोगे। दुनिया को तुमको माया समझना होगा। धार्मिक यात्रा पर जगन्नाथ, गोदावरी, गंगा, जमुना के तट पर जाना पड़ेगा। जोगी बनना आसान नही है। तुम जाट जोग नहीं पा सकते।’

रांझा ने बालनाथ की सारी शर्तों को स्वीकार करने का वचन दिया। कहा, ‘मुझे आप जोगी बनाइए। मैं फकीरी के सागर में डुबकी लगाना चाहता हूं। मैं दुनिया के सारे सुखों का त्याग कर दूंगा। आप अपनी शरण में आए हुए का दिल नहीं तोड़ सकते।’ बालनाथ फिर भी आश्वस्त नहीं हुए। वह शंका करते रहे। उन्होंने कहा, ‘जोग उसी के लिए जिसे मौत से प्यार हो। इसके लिए अपने जुनून पर नियंत्रण के साथ बहुत धैर्य चाहिए। जोग का मतलब जिंदा रहते भी मरे हुए इंसान की तरह जीना। अपने शरीर की बांसुरी से उस ईश्वर के गीत गाना। जहां अहंकार को खत्म करना होता है। यह बच्चों का खेल नहीं है। मैं फिर कह रहा हूं तुम जोगी नहीं बन सकते। इसलिए इस बारे में और ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है। देखो बच्चे, ईश्वर हर जगह उसी तरह है जैसे माला के मोतियों में धागा रहता है। वह जिंदगी की हर शै में सांस लेता है। वह दुनिया के हर रंग में है। वह मेंहदी में भी है और बदन के लहू में भी।’

बालनाथ के इतना समझाने पर भी रांझा जिद पर अड़ा रहा और जाने से इंकार कर दिया। उसने बालनाथ से कहा ‘आपको देखकर मेरी आत्मा पर से बोझ हट गया है। मैं संसार का सुख त्यागकर यह दुख उठाने को तैयार हूं।’ अब बालनाथ पिघल गए।

जब चेलों ने बालनाथ को रांझा की बातों से पिघलते देखा तो वह ताना देने लगे, ‘आप इस जाट को जोगी बनाना चाहते हैं जबकि इतने सालों से जो आपसे जोग पाने के लिए दुख उठा रहे हैं उनकी तरफ आप ध्यान नहीं देते।’ रांझा ने उन सबको समझाने की कोशिश की, ‘देखिए,आप सब मेरे लिए बालनाथ के समान हैं। आप सब मेरे भाई हैं। आप लोगों की मदद से ही मैं मुक्ति पाने की कामना करता हूं।’

इस पर चेलों ने कहा, ‘देखो बच्चे हम अठारह साल से भीख मांगकर बालनाथ की सेवा कर रहे हैं। दिन रात ईश्वर को याद करते हैं। फिर भी इन्होंने अब तक हमें जोगी नहीं बनाया। वह कभी आग बन जाते हैं तो कभी पानी। हम आज तक बालनाथ के रहस्य को नहीं समझ पाए।’ अब बालनाथ के खिलाफ चेलों ने विद्रोह कर दिया। उन्होंने जोगी बनने का रास्ता छोड़ने का फैसला किया और वहां से जाने लगे। वह बालनाथ को बुरा भला भी कह रहे थे। इस पर बालनाथ भी गुस्सा हो गए। उनकी आंखें क्रोध से लाल हो गईं। उनका यह रूप देखकर चेलों के होश उड़ गए। वह उनके आगे नतमस्तक हो गए। उनके दिमाग में सारी बुरी बातें जलकर राख हो गईं।

गुरू बालनाथ ने रांझा के शरीर पर राख मल दिया और गले से लगा लिया। रांझा के कानों में बालियां पहनाई गईं। उसके हाथ में अब भीख का कटोरा था। बालनाथ ने उसे जोगी बना दिया। लेकिन बालनाथ की एक बात पर रांझा भड़क गया। बालनाथ ने कहा, ‘दुनिया की औरतों को गलत निगाह से कभी मत देखना। उन्हें मां बहन मानना।’ अब रांझा तो हीर को पाने के लिए जोगी बना था, वह बालनाथ की यह बात नहीं मान सकता था।

रांझा ने कहा, ‘आपकी यह बात मैं गले से नहीं उतार सकता। एक नौजवान पर आप अपनी हर बात थोप नहीं सकते। किसने आपको यह सिखाया है?’ बालनाथ इस पर गुस्से में बोले, ‘देखो तुमने जोग का रास्ता चुना है इसलिए सारे अपवित्र विचार तुमको त्यागने होंगे। फकीरों को बदनाम मत करना।’

अब रांझा बोला, ‘ईश्वर के प्रेम में जब कोई जोगी बन जाता है, दुनिया छोड़ देता है तो मैं हीर के प्रेम में ऐसा क्यों नही कर सकता। मैं हीर के इश्क में फकीर बना हूं ताकि उसके सिवा किसी और का ख्याल न कर सकूं। अगर मुझे पता होता कि तुम मुझे मेरी हीर को भुलाने को कहोगे तो मैं तुम्हारे पास इतनी दूर चलकर कभी न आता।’

बालनाथ रांझा की बात सुनकर उदास हो गए। कहा, ‘मैंने तुमको जोगी बनाकर भूल कर दी। रांझा! बुरे विचारों को छोड़कर सच्चे फकीर बनो।’ इस पर रांझा ने भी हीर से अपनी दीवानगी भरी मोहब्बत से फकीर बनने तक का किस्सा सुना दिया। ‘मैंने हीर के लिए घर संसार सब छोड़ दिया। हम दोनों प्यार करते हैं लेकिन खेरा हीर को छीन ले गए। मुझे हीर से जुदा कर दिया, मुझे दुनिया में उसके सिवा कुछ नहीं चाहिए। मेरे पास हीर नहीं रही तो मैं फकीर बन गया हूं।’

रांझा बालनाथ से कहने लगा, ‘आप सच्चे गुरू मिले। आपने मुझे जोगी बनाया। एक भटके हुए नाव को किनारा दिया। अब मुझे हीर से मिला दीजिए। मैं बस इतना ही चाहता हूं। मुझे भीख में बस हीर चाहिए, और कुछ नहीं।’ अब बालनाथ समझ गए कि रांझा इश्क में घायल होकर यहां आया था और वह हीर की तलाश कभी छोड़ नहीं सकता। बालनाथ ने ईश्वर से रांझा के लिए प्रार्थना की, ‘हे ईश्वर, जमीं आसमां के मालिक, रांझा ने हीर के इश्क में अपना सब कुछ त्याग दिया और फकीर बना है। उसको जो चाहिए, उसे दे दो।’

बालनाथ ने रांझा को विदा करते हुए कहा, ‘रांझा, जाओ, ईश्वर तुम्हारी सारी इच्छा पूरी करेंगे। जाओ, खेराओं से लड़कर अपनी हीर को हासिल करो।’ कहानी आगे पढ़ें।

कहानी शुरू से पढ़ें।
कहानी के पन्ने
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34
Advertisements

कमेंट्स यहां लिखें-

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s