हीर रांझा 28 – रंगपुर पहुंचा रांझा, हीर से हुई पहली मुलाकात

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जोगी बनने के बाद रांझा बालनाथ को अलविदा कह टिल्ला से रंगपुर की तरफ चला। रांझा का नस नस प्रेम में डूबा हुआ था। वह जब रंगपुर के इलाके में पहुंचा तो वहां कुएं से पानी ले जाने वाली औरतों को उस पर शक हुआ। उन्होंने आपस में कहा, ‘यह जोगी तो हीर का प्रेमी रांझा लग रहा है।’ लेकिन औरतों ने रांझा से कुछ नहीं कहा।

रंगपुर में रांझा घर घर जाकर भीख मांगने लगा। धीरे धीरे वहां उस जोगी की तरफ सब खिंचने लगे। सब अपना दुखड़ा लेकर फकीर रांझा के पास आने लगे। सैदा की बहन सेहती तक यह बात पहुंची तो वह हीर से जाकर बोली, ‘बहन, इस जोगी का रूप तो चांद की तरह है। लेकिन ऐसा लगता है जैसे उसका कुछ खो गया है, जिसे वह तलाश रहा है। वह जोर जोर से कहता रहता है, ‘मेरे यार, खुदा तुम्हारे साथ हो।’ शायद किसी प्रेमी के लिए वह यह दुआ करता है। कुछ लोग कह रहे हैं कि वह तुम्हारे गांव सियाल से आया है। कोई कह रहा है कि वह तख्त हजारा से आया है। कोई कह रहा है कि वह जोगी नहीं है, हीर के लिए उसने यह वेश बना लिया है।’

इस पर हीर ने जवाब दिया। ‘तुम इस बारे में मुझसे कोई बात मत करो। तुम्हारी बातों से ऐसा लग रहा है, वह रांझा ही है। उसके प्यार ने मेरा जीवन ऐसे ही बरबाद कर दिया है। वह क्या मुझे मौत देने आया है। आखिर फकीर बनकर उसे क्या मिलेगा?’ हीर की आंखों से आंसू झरने लगे। ‘उसे किसी तरह यहां ले आओ। मैं भी देखूं कि वह कौन है और क्यों फकीर बन गया है।’

हीर का दिल रांझा को देखने के लिए बेचैन हो गया। वह जुदाई बरदाश्त नहीं कर पा रही थी। वह रांझा से मिलने का रास्ता तलाशने लगी। उधर रांझा भी हीर के दरवाजे पर भीख मांगने जा पहुंचा। उसने जोर से कहा। ‘फकीर को भिक्षा दो।’

सेहती घर से निकल कर आई। ‘जोगी, तुम्हारे पास तो बहुत ताकत होगी। क्या तुम दुल्हन हीर की बीमारी पहचान कर उसे ठीक कर सकते हो। वह दिन पर दिन कमजोर होती जा रही है।’ इस पर रांझा ने कहा, ‘देर न करो, उसे जल्दी यहां लाओ, मैं भी देखूं कि उसे क्या हुआ है?’ सेहती उधर हीर को बुलाने चली गई, इधर हीर खुद ही बाहर निकल आई। लेकिन वह परदे के भीतर ही रही। परदे के पीछे से हीर बोली, ‘जोगी, यहां से चले जाओ, क्यों कोई अपने दिल का दर्द किसी जोगी, अजनबी या मूर्ख को बताए।’

जोगी बोला, ‘मैं खुदा का बंदा हूं। यह फकीर दो बिछड़े प्रेमियों को मिला सकता है। खोए हुए दोस्तों को वापस ला सकता है। ऐसे फकीरों को जाने को कहना ठीक नहीं।’ हीर ने जवाब दिया, ‘यह सच नहीं है जोगी। जुदा हो चुके दो दिलों को कोई नहीं मिला सकता। मैंने बहुत तलाशा लेकिन ऐसा कोई न मिला जो यह काम कर सके।’

इस पर जोगी ने कहा, ‘तुमको अपने आशिक को खोजने बाहर जाने की जरूरत नहीं है। वह तो तुम्हारे घर में ही है। परदा हटाकर देखो अगर तुमको अपना खोया प्रेमी न दिखे तो फिर कहना।’

हीर ने परदा हटा दिया। उसने जोगी को देखा और देखती रह गई। वह उसका खोया रांझा था। उसने धीरे से कहा, ‘हमारे बारे में सेहती को पता न चले।’ जोगी बोला, ‘ऐ खेराओं की बहू, चिंता न करो। ऐसा कुछ नहीं होगा। बस अपने यार का ख्याल रखना।’ कहानी आगे पढ़ें।

कहानी शुरू से पढ़ें।
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