हीर रांझा 30 – सेहती को हीर ने मनाया और रांझा से मिलने भेजा

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रांझा हीर के घर से लौटकर कालाबाग के बगीचे में चला गया और धूनी रमाने लगा। वह आग जलाकर ईश्वर का ध्यान करने लगा। रंगपुर की लड़कियां एक दिन उस बगीचे में घूमने आई। खूबसूरत परियों के आने से बगीचा जन्नत बन गया। लड़कियों ने जोगी की झोपड़ी देखी तो उनको शैतानी सूझी। सबने झोपड़ी को तोड़ दिया। जल रहे आग को बुझा दिया और वहां रखे बर्तनों को तोड़ दिया। जब जोगी रांझा ने यह सब देखा तो गुस्से से चिल्ला उठा। सभी लड़कियां वहां से भागी लेकिन एक लड़की को रांझा ने पकड़ लिया और वह ‘बचाओ बचाओ’ पुकारने लगी। वह लड़की रांझा से कहने लगी, ‘मुझे छोड़ दो। मैं तुम्हारा संदेशा हीर तक पहुचाऊंगी। हम सब जानते हैं कि हीर तुमसे प्यार करती है।’

हीर का नाम सुनकर रांझा को राहत मिली। लड़की रांझा का संदेशा लेकर हीर तक आई, बोली, ‘मैं सहेलियों के साथ कालाबाग के बगीचे में गई थी। वहां हमें रांझा मिला। उसने कहा कि वह दिनभर गांव के रास्ते पर नजरें टिकाए रहता है। तुम्हारे इंतजार में रातों को तारे गिनते हुए रोता रहता है। वह बहुत दुख में जी रहा है।’

इस पर हीर ने लड़की से कहा, ‘रांझा ने ये भेद तुमको क्यों बताईं। सच्चे प्रेमी अपने दिल की बात किसी को नहीं बताते। जो प्रेम का राज दूसरों के आगे उगलते हैं वो हारे हुए प्रेमी कहलाते हैं। रांझा की बुद्धि को क्या हो गया है जो वह इस मामले को और बिगाड़ने पर तुला है?’

हीर ने कुछ सोचा और सेहती के पास  गई। उसने सेहती के पैर पकड़ लिए और उसका दिल जीतने की कोशिश करने लगी। ‘बहन, मुझे माफ कर दो। मैंने तुमको बुरा भला कहा। तुम मुझे उसके बदले दुबारा गाली दे लो लेकिन मुझे मेरे आशिक से मिला दो। मैं तुम्हारी गुलामी करूंगी। मेरे पास जितनी धन दौलत है, सब तुम ले लो। रांझा और मैं एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते। रांझा ने मेरे लिए बहुत कुछ सहा है। उसने घर छोड़ दिया, भैंसों की देखभाल की। जोगी बन गया। यह सब उसने मेरी खातिर किया।’

सेहती ने कहा, ‘तुम अपने मतलब को हासिल करने के लिए मेरे पैर पकड़ रही हो। तुमने मुझे अपने घर से बाहर निकाल दिया और अब आकर मेरे आगे हाथ जोड़ रही हो। दुनिया में हर कोई अपने स्वार्थ के लिए किसी हद तक जा सकता है।’

हीर यह सुनकर और भी मीठी आवाज में उससे कहने लगी, ‘बहन, मुझपर दया करो। मैं मुश्किल मैं हूं। मेरी मदद करो। कालाबाग के बगीचे में जोगी से मुझे मिला दो। तुम अच्छा काम करोगी तो खुदा भी तुम्हारी दुआ कुबूल करेंगे। तुम हीर को रांझा से मिलाओगी तो तुमको भी खुदा तुम्हारे प्रेमी मुराद से मिलाएंगे।’ यह सुनते ही सेहती का दिल गदगद हो गया। उसने हीर से कहा, ‘जाओ, मैंने तुमको माफ किया। तुम प्यार में शुरू से ही वफादार रही हो इसलिए दो प्रेमियों को मिलाने में मदद करूंगी।’

सेहती जोगी रांझा से मिलने कालाबाग पहुंची। वह जोगी के लिए खाना लेकर गई थी। सेहती ने रांझा को सलाम कहा लेकिन वह भड़क गया। ‘यहां क्यों आई हो तुम। दुनिया के सारे झगड़े तुम औरतों की वजह से हैं। यह हव्वा ही थी जिसके कारण आदम को जन्नत से निकाला गया।’

इस पर सेहती ने कहा, ‘नहीं, आदम के जन्नत से निकाले जाने की वजह हव्वा नहीं थी। यह आदम की हवस थी। जब फरिश्ते ने उसने फल खाने से मना किया था उसने क्यों खाया। लेकिन हवस आदमी से कुछ भी करवाता है। उसने फल खाया और जन्नत से निकाला गया।’

रांझा ने कहा, ‘बकबास कर रही हो तुम। औरतें शुरू से ही बुरी रही हैं। कब उसने वफादारी निभाई है? हमेशा धोखा ही किया है।’

सेहती ने जवाब दिया, ‘क्यों, औरतों को गाली दे रहे हो। बुरे तो मर्द होते हैं जो शादी के बाद बीवी को छोड़कर दूसरी औरतों के लिए मुंह मारते फिरते हैं। जब बीवी उसे छोड़कर चली जाती है तब वह औरतों को गाली देना शुरू कर देता है। यह पाखंड है। तुम क्यों उसमें बुराई खोज रहे हो जिसने तुमको जन्म दिया। तुम उनको शैतान की बेटी साबित करने पर क्यों तुले हो। अगर धरती पर औरतें नहीं होंगी तो दुनिया खत्म हो जाएगी। तुम क्यों जोगी बने फिर रहे हो? क्यों किसी लड़की से कहकर हीर तक संदेशा पहुंचाते हो। धोखेबाज तो तुम हो और अपने आपको बहुत बुद्धिमान समझ रहे हो।’

यह सुनकर रांझा का गुस्सा थोड़ा कम हुआ। सेहती ने भी देखा कि हीर के लिए रांझा कितना दुख उठा रहा है तो वह भी शांत हुई। जब दोनों ही शांत हो गए तो रांझा ने अपनी बात छेड़ी, ‘मैंने हीर के सालों पशुओं की रखवाली करने का काम करता रहा। उससे कहना कि वह चरवाहा उसे पुकार रहा है। मुझे मेरी हीर से मिला दो तो हम दोनों मिलकर तुम्हें तुम्हारे मुराद से मिलने में मदद करेंगे। हीर से कहना कि मैंने क्या गलती की जो वह मुंह फेर रही है। मैं उसका चांद जैसा चेहरा देखने को आतुर हूं। उसकी जुल्फों में उलझकर रह गया हूं और उसकी आंखों के काजलल ने मेरे दिल को चीर दिया है। प्रेम ने मुझे बेशरम बना दिया है। हीर, या तो तुम यहां बगीचे में मिलने चली आओ या मुझे अपने घर बुला लो।’

इस पर सेहती से नहीं रहा गया। वह कहने लगी, ‘मैं भी मुराद के बिना नहीं जी सकती। मैं तुमको हीर से मिलवाऊंगी लेकिन तुमको भी मुराद से मुझे मिलवाना होगा। तुम मुराद को ला दोगे तो मैं तुम्हारे पैरों पर गिर पड़ूंगी। मैं दिन रात उसके प्यार में जलती रहती हूं।’ रांझा ने सेहती को मदद का भरोसा दिलाकर विदा किया। कहानी आगे पढ़ें।

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